Dearness Allowance : आ गया हाई कोर्ट का बड़ा फैसला ! अब कर्मचारियों को मिलेगा नए वेतनमान का लाभ. पढ़िए खबर !

Dearness Allowance :– ये हुईं न बात. कर्मचारियों के लंबित मामले पर कोर्ट का बड़ा फैसला ! मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के तरफ से कर्मचारियों के लिए खुसखबरी हैं। क्योंकि साल 2002 से लंबित वेतनमान से सम्बंधित मामले पर सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट ने कर्मचारियों के हक़ में फिसला सुनाया है। जिसके तहत प्रदेश के शासकीय स्कूल में कार्यरत कर्मचारियों के वेतन मान उपलब्ध कराने के लिए कोर्ट ने आदेश पारित कर दिए हैं। आईए जानें पूरी खबर।

Dearness Allowance

Dearness Allowance
Dearness Allowance

Dearness Allowance in MP :- हाईकोर्ट के आदेशानुसार वर्ष 2010 से पहले नियमों के तहत लगे सभी कर्मचारियों को यूजीसी पे स्केल के तहत वेतनमान उपलब्ध कराया जाएं। स्कूल में कार्यरत 6th pay commission कर्मचारियों को भी उसी की तर्ज पर सैलरी उपलब्ध कराया जाएगा। ताकि वह अपने जीवन का भरण पोषण कर सकें।

साथ ही हाईकोर्ट ने एक याचिका में तर्क दिया गया है कि,”राज्य सरकार या केंद्र सरकार द्वारा अपने कर्मचारियों के लिए निर्धारित वेतनमान उच्च न्यायालय के कर्मचारियों पर लागू होते हैं, भले ही उच्च न्यायालय के कर्मचारियों द्वारा किए गए कर्तव्य की प्रकृति अलग और उनके द्वारा किए गए कर्तव्य की प्रकृति से अलग हो। राज्य या केंद्र सरकार के कर्मचारी। दूसरी ओर इसके परिणामस्वरूप उच्च न्यायालयों में कर्मचारियों के वेतन और अन्य सेवा शर्तों में असमानता होती है।”

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कोर्ट ने क्या कहा कर्मचारियों को बराबर वेतनमान अधिकार वाले मुद्दे पर !

DA hike News :- कोर्ट ने अपनी सुनवाई में ये स्पष्ट किया है कि सामान्य कार्य का निर्वहन करने वाले कर्मचारियों को समान वेतन का भुगतान करने से इनकार नहीं किया जा सकता है, उन्हें समान वेतन का लाभ दिया जाना चाहिए। याचिकाकर्ताओं द्वारा 2002 में सहायक लाइब्रेरियन के 88 पद के लिए आवेदन किया गया था। साथ ही साथ समरूप वर्ग के कर्मचारियों को बराबर वेतनमान पाने का पूरा अधिकार है। मामले से पहले हाई कोर्ट द्वारा 100 सहायक लाइब्रेरियन की याचिका को कोर्ट द्वारा स्वीकार किया गया था।

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हाई कोर्ट ने याचिका कर्ताओं के हित में सुनाया अपना फैसला

MP karmchari :- 2010 से पहले नियमित सभी कर्मचारियों को यूजीसी वेतनमान उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इतना ही नहीं याचिकाकर्ताओं द्वारा यह स्पष्ट भी किया गया है कि उनकी भर्ती और पदोन्नति नियम 2000 के तहत योग्यता और नियम के अनुरूप हुई है। इसलिए उन्हें भी समान वेतनमान का लाभ उपलब्ध कराया जाना चाहिए। अदालत की ओर से याचिकाकर्ता की बात पर स्पष्टीकरण मिलने के बादअदालत ने याचिकाकर्ताओं के हित में महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। सरकार को आदेश दिए हैं कि इन्हें भी यूजीसी की तर्ज पर वेतनमान का लाभ दिया जाए।

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आखिर क्या था याचिकाकर्ता का आरोप ?

7th Pay Commission :– याचिकाकर्ताओं के द्वारा लगाए गए आरोप की तरफ रुख करे तो उन्हें वर्ष 2010 के बाद से यूजीसी की तर्ज पर वेतनमान का लाभ नहीं दिया जा रहा। इससे पहले साल 2009 में एक बार पुनः विज्ञापन जारी किया गया था। जिसमें स्पष्ट किया गया कि साल 2002 में आवेदन करने वाले याचिकाकर्ताओं को दोबारा आवेदन की आवश्यकता नहीं पड़ेगी, और उनका चयन किया गया था। अनुबंध के आधार पर उन्हें नौकरी दिए जाने के बाद 2015 में इनकी सेवाओं को नियमित कर दिया गया।

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