Income tax Rules : इनकम टैक्स पेयर को मिल रहा है 3.5 लाख रुपये का फायदा, तुरंत जानिए डिटेल्स।

How to Save Tax: जिस तरह से एक नागरिक की यह जिम्मेदारी है कि वह आयकर का भुगतान करे।उसी तरह उसके पास कर संग्रह करने का भी आपराधिक अधिकार है।लेकिन कर जमा करने से पहले उसके लिए कर प्रणाली के विकल्प को पहचानना बहुत जरूरी है।प्रत्येक व्यक्ति को अपनी कमाई पर आयकर देना होता है, यह प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी है।रहवासियों द्वारा दिए गए टैक्स के पैसे से सरकार स्कूल, सड़क और तमाम तरह की सुविधाएं मुहैया कराती है।इसके साथ ही सरकार नागरिकों को कानूनी रूप से टैक्स जमा करने का अधिकार भी देती है।टैक्स सेविंग के तमाम तरीके कानूनी तौर पर अपनाकर पचास हजार रुपए की मासिक कमाई को भी टैक्स मुक्त किया जा सकता है।सरकार ने इनकम टैक्स के विकल्प दिए हैं।

कौन से हैं दो विकल्प ?

भारत के आधुनिक टैक्स सिस्टम में कई तरह के विकल्प उपलब्ध हैं।वित्त वर्ष 2020-21 के बजट के दौरान वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने नई टैक्स व्यवस्था की घोषणा की थी।इस तरह, कर विकल्प उपलब्ध हैं और करदाता उनमें से किसी को भी चुन सकते हैं।पुरानी कर व्यवस्था के भीतर कर कटौती विकल्पों की कई शैलियाँ हैं।वहीं, नए संविधान में इनमें से ज्यादातर को हटा दिया गया।

6 लाख सालाना की कमाई टैक्स फ्री

जानकारों के मुताबिक, अगर आपका मंथली मुनाफा 50 हजार रुपये है।इसके अलावा अगर आपके पास कमाई का कोई और जरिया नहीं है तो आपकी सालाना कमाई कुल 6 लाख रुपये हो जाती है।ऐसे में अगर आप पुराना टैक्स स्ट्रक्चर चुनते हैं तो आपको आयकर की धारा 80सी (आईटी एक्ट 80सी) के तहत 1.5 लाख रुपये तक की कटौती का लाभ मिलता है।इसके अलावा 50 हजार रुपये की आधुनिक कटौती का लाभ भी लाभ सौंदर्य को मिलता है।

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नए टैक्स स्ट्रक्चर पर देनदारी

जानकारों का कहना है कि नया टैक्स फॉर्म चुनने से नुकसान भी हो सकता है।इस टैक्स फॉर्म में सालाना 2.50 लाख रुपए तक की कमाई टैक्स फ्री होती है।इसके बाद 2.5 लाख रुपए पर 5 फीसदी के हिसाब से टैक्स लगता है, जो 12,500 रुपए हो जाता है।वहीं, 6 लाख रुपये की सालाना कमाई पर टैक्स देनदारी 23,400 रुपये है,यदि आय 5 लाख रुपये से 1 लाख रुपये से अधिक है, तो 1 लाख रुपये की राशि दस प्रतिशत ब्रैकेट के नीचे आती है।इसलिए, इस पर 10,000 रुपये की कर कानूनी जिम्मेदारी है।इसके अलावा, परिकलित कर पर 4% का उपकर है।अगर टैक्स 12,500 रुपये है तो सेस 900 रुपये हो जाएगा।

1.5 लाख रुपए तक रख सकते हैं !

1.5 लाख रुपये को आप 80C से नीचे रख सकते हैं.इसके लिए ईपीएफ, पीपीएफ, ईएलएसएस, एनएससी में पैसा लगाना होगा।अगर आप नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) में एक-एक करके सालाना 50,000 रुपये तक का निवेश करते हैं तो 80CCD (1B) के तहत आप अतिरिक्त 50,000 रुपये की आयकर छूट का लाभ उठा सकते हैं।गृह बंधक देनदार अतिरिक्त 2 लाख रुपये रख सकते हैं।

पुराने टैक्स स्ट्रक्चर पर देनदारी

अब अगर एंटीक टैक्स स्ट्रक्चर की बात करें तो 2.5 लाख रुपए तक का मुनाफा टैक्स फ्री होता है।इसके बाद 2.5 लाख से पांच लाख तक के मुनाफे पर पांच फीसदी की दर से टैक्स लगता है।लेकिन सरकार की तरफ से 12,500 रुपये की छूट मिलने से यह भी 0 हो जाएगा।इस तरह पुराने टैक्स स्ट्रक्चर के तहत अब आपको 5 लाख रुपए की कमाई पर टैक्स नहीं देना होगा।

जीरो टैक्स कैसे होगा ?

आयकर नियम वास्तव में कहते हैं कि पांच लाख रुपये के मुनाफे पर कर 12,500 रुपये (2.5 लाख रुपये का पांच%) है।आयकर की धारा 87ए के तहत मिलने वाली 12,500 रुपये की छूट पर अब आपको कोई टैक्स नहीं देना होगा।पांच लाख के स्लैब में 0 टैक्स देना होगा।