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UP Election 2022 : कहीं पुरानी गलती तो नहीं दोहरा रहे हैं अखिलेश यादव

UP Election 2022 : एक तरफ कुर्सी की लड़ाई तो दूसरी तरफ बयानबाजी का दौर तेजी से जारी है। सपा मुखिया अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) विधानसभा चुनाव (Assembly Election) में जीत मुकम्मल करने के लिए तरह-तरह के हथकंडे अपना रहे हैं। बीजेपी में बैठे नेताओं को अपना उम्मीदवार घोषित करने की बात कर रहे हैं तो कहीं अन्न संकल्प ले रहे हैं। इतनी तेजी और उनकी बयानबाजी ये स्पष्ट रूप से संकेत कर रही है कि अखिलेश यादव अभी भी राजनीतिक लड़ाई लड़ने में कोई चूक कर रहे हैं। ये बात इसिए क्योंकि वो दिन अच्छी तरह याद है जब मार्च 2012 के विधानसभा चुनाव में 224 सीटें जीतकर अखिलेश यादव उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बने थे।

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मुलायम सिंह यादव ने की थी अखिलेश के काम की आलोचना

मुख्यमंत्री बनने के बाद जुलाई 2012 में मुलायम सिंह यादव (Mulayam Singh Yadav) अर्थात् अखिलेश यादव के पिता ने ही उनके काम की आलोचना की और सुधार करने के उचित दिशा निर्देश भी दिए। बात यहीं खत्म नहीं हुई बल्कि इसका असर आम जनता पर पड़ने लगा। जनता को खुली आंखों से साफ दिखाई दे रहा था कि जिसे हमने अपना नेता चुना वो सरकार तो उनके चाचा और पिताजी के सौजन्य से चल रही है। एक पल के लिए जनता ने ये कयास लगाना शुरू कर दिया कि या तो अखिलेश यादव को राजनीतिक तौर तरीकों का कोई इल्म ही नहीं है या फिर बात कुछ और ही है।

मुजफ्फरनगर के दंगे से अखिलेश यादव की हुई थी किरकिरी

अभी जनता इन खयालों में गोते लगा ही रही थी कि अचानक वर्ष 2013 में ही मुजफ्फरनगर में दंगा हो गया। ये मात्र दंगा ही नहीं था बल्कि अखिलेश यादव की कुर्सी के लिए एक बहुत बड़ी चुनौती बन गई। इस दंगे में 43 लोग मारे गए थे तो वहीं 93 लोग घायल भी हुए थे। इस दर्दनाक हादसे के बाद कर्फ्यू लगाना पड़ा था। हिंदू और मुस्लिम के बीच हुए इस भयंकर विवाद ने न सिर्फ अखिलेश सरकार पर प्रश्नवाचक चिन्ह लगाया था बल्कि जनता को अंदर से हिला कर रख दिया था।

जुलाई 2012 में मुलायम सिंह यादव की आलोचना से यदि अखिलेश यादव ने सीख ली होती तो शायद उनकी समस्या बढ़ी नहीं होती। क्योंकि पिता की आलोचना के बाद अब अखिलेश यादव की आलोचना पूरी जनता कर रही थी। नतीजा ये हुआ कि अखिलेश यादव जो छवि लोगों के अंदर बनाना चाहते थे वो मुजफ्फरनगर के दंगे ने धूमिल कर दी।

चुनौती बना अन्न संकल्प

ठीक उसी तरह से अखिलेश यादव एक बार फिर तेजी दिखा रहे हैं और इस बार अवसर को चूकना नहीं चाहते हैं। लेकिन जिस तरह से वो अवसर का लाभ भाजपा खेमे के नेताओं को टिकट का प्रलोभन देकर उठाना चाहते हैं ये उनके लिए नई मुसीबत भी खड़ा कर सकता है। क्योंकि जनता को ये अब साफ समझ में आने लगा है कि सत्ता में आने के लिए अखिलेश यादव इस बार हर संभव प्रयास में जुटे हैं। अब तो उन्होंने भाजपा को हराने के लिए अन्न संकल्प लेकर अपनी छवि बचाने के लिए एक और चुनौती ले ली।

अगर इस बार सत्ता हांथ से फिसल गई तो किरकिरी पहले से भी ज्यादा होगी। भाजपा का साफ तौर पर कहना है कि हमें अपना ढोल पीटने की जरूरत नहीं है। हमलोगों ने जिस तरह से विगत वर्षों में काम किया है जनता उसका परिणाम सोच-समझकर देगी। वहीं अखिलेश यादव की पूरी नजर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर है। क्योंकि भाजपा द्वारा गोरखपुर की सीट पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) को चुनाव लड़ाने के फैसले पर अखिलेश यादव ने स्पष्ट रूप से ये बयान दिया था कि भाजपा ने उनको घर भेज दिया और हम भी जनता के साथ मिलकर उनको विदाई दे देंगे।

गोरखपुर के भाजपा विधायक को सपा मुखिया ने दिया ऑफर

वहीं दूसरी तरफ समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने गोरखपुर के भाजपा विधायक डॉक्टर राधा मोहन दास अग्रवाल को भी लालच देते हुए कहा कि यदि वो चाहें तो पार्टी तुरंत उनको अपना उम्मीदवार घोषित करेगी। अखिलेश यादव यहीं नहीं रूके उन्होंने कहा कि मुझे बहुत अच्छी तरह से याद है कि मुख्यमंत्री योगी दित्यनाथ के शपथ ग्रहण कार्यक्रम में राधा मोहन दास को बैठने के लिए कहीं जगह नहीं दी गई थी। उनका सबसे ज्यादा अपमान भाजपा ने किया है।

By Team UPR

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