Work From Home : वर्क फ्रॉम होम करने वालों को मिल सकता है ये बड़ा तोहफा

Work From Home : देश में कोरोना की दस्तक होने के बाद से ही बहुत सारी चीजों में उतार-चढ़ाव शुरू गया है। लोगों का जीवन बहुत प्रभावित हुआ है। ऐसे माहौल में न जाने कितने लोगों की नौकरियां भी समाप्त हो गईं। वहीं कई ऐसे लोग भी हैं जिनको वर्क फ्रॉम होम (Work From Home) की सुविधा दे दी गई है। ऐसा करने से लोग कोरोना महामारी (Covid-19) से बच सकते हैं। यहां तक कि छोटे बच्चों को भी ऑनलाइन पढ़ाया जा रहा है। जिससे कि वो भी इस खतरनाक महामारी के संपर्क से बच सकें।

कर्मचारियों को मिल सकता है वर्क फ्रॉम होम अलाउंस

ऐसे में वर्क फ्रॉम होम करने वालों के लिए इस बार के बजट में सुविधा मिलने की आशंका जताई जा रही है। विगत वर्षों में तो ऐसी कोई सुविधा सरकार (Government) ने नहीं दी। लेकिन इस बार कर्मचारियों को कुछ उम्मीद दिखाई दे रही है।  कर्मचारियों को वर्क फ्रॉम होम अलाउंस मिल सकता है।

वर्क फ्रॉम होम के दौरान कर्मचारियों को हो रही है समस्या

वहीं देखा जाए तो वर्क फ्रॉम होम के दौरान कर्मचारियों को कई सारी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। ऑफिस में रहने पर बिजली, इंटरनेट, खान-पान आदि की सुविधाएं कंपनी की तरफ से दी जाती हैं। लेकिन जबसे वर्क फ्रॉम होम की शुरूआत हुई है तब से कर्मचारियों को इन सभी सुविधाओं के लिए खुद से ही पैसा खर्च करना पड़ रहा है। यहां तक कि कंपनियां इंटरनेट का भी पैसा नहीं देती हैं और उनका काम पूरा होना चाहिए। इस दौरान कर्मचारियों को बहुत समस्या झेलनी पड़ रही है।

इस कंपनी ने सरकार से की मांग

बताते चलें कि विगत दिनों टैक्स सर्विस और फाइनेंशियल सर्विस मुहैया करने वाली Deloitte India कंपनी ने घर से काम करने वाले लोगों के लिए वर्क फ्रॉम होम अलाउंस देने की मांग उठाई है। इस कंपनी की तरफ से एक बयान आया है कि यदि सरकार सीधे तौर पर अलाउंस नहीं दे सकती है तो आयकर में ही छूट की व्यवस्था कर दे। बताते चलें कि इस कंपनी ने ब्रिटेन में वर्क फ्रॉम होम का मुद्दा उठाया है।

यदि वित्त मंत्री ने कंपनी की मांग पर गंभीरता से विचार किया तो वर्क फ्रॉम होम (Work From Home) कर रहे कर्मचारियों को 50000 रूपए तक का अलाउंस दिया जा सकता है। मिली जानकारी के मुताबिक ICAI (Institute of Chartered Accountents of India) ने भी कुछ ऐसी ही मांग सरकार से की है। हांलाकि ICAI की तरफ से ये कहा गया है कि टैक्सपेयर्स को स्टैंडर्ड डिडक्शन में राहत प्रदान करने के लिए लिमिट बढ़ाना होगा। फिलहाल में स्टैंडर्ड डिडक्शन की लिमिट 50000 रूपए है जिसे 1 लाख रूपए तक करने की मांग उठाई जा रही है।

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