Young Generation : धर्म के नाम पर बंट रहे युवा

Young Generation : आज का मानव समाज धर्म (Religion), जाति (Caste) और ऊंच नीच के चक्रव्यूह में फंस कर अजीब कश्मकश में घिरता जा रहा है। इसका मुख्य कारण है लोगों की छोटी सोच और ज्ञान की कमी। आजकल युवा पीढ़ी इसमें बेहतर भागीदारी निभा रही है। एक ऐसी अकड़ और खुद को बड़ा समझने की भूल ने लोगों के अंदर का प्रेम ही खत्म कर दिया है। अब लोग एक-दूसरे से प्रेम देखकर नहीं बल्कि उनकी हैसियत, उनका धर्म और बिरादरी देखकर बात करते हैं।

युवाओं में ज्ञान की कमी

शर्म तो तब आती है जब आजकल के युवा जिनको देश दुनिया, अध्यात्म, संस्कृति किसी बात का कोई ज्ञान नहीं है वो अभी समाज को देखकर जीना सीख रहे हैं ऐसे लोग भी हिंदू और मुसलमान की बात करते हैं। जो घर में एक अगरबत्ती तक नहीं जलाते और गर्लफ्रेंड को छोड़कर भगवान के दरबार में भी नहीं जाते वो राम मंदिर (Ram Mandir) और बाबरी मस्जिद की बात करते दिखाई देते हैं।

धर्म और जाति को लेकर आमने-सामने आ रहे युवा

हमें शर्म आनी चाहिए कि हम हिंदू और मुसलमान के मुद्दों पर घंटों बहस कर जाते हैं जिसका कोई मतलब नहीं है। युवाओं को बर्बाद करने में सबसे पहला कदम घर के लोग ही बढ़ाते हैं। युवाओं को देश का भविष्य माना जाता है लेकिन हैरत की बात ये है कि जब सोच इतनी गंदी अभी से हो गई तो देश का क्या इनका खुद का भविष्य भी अधर में है। सवाल तो ये है कि अपना भविष्य बेहतर बनाने की उम्र में ये युवा धर्म और जाति को लेकर आमने-सामने क्यों आ जाते हैं। ये लोग न तो देश की गरीबी पर उलझते हैं, न तो शिक्षा व्यवस्था पर लड़ते हैं, न तो जातिवाद खत्म करने के लिए लड़ते हैं, न तो स्वास्थ्य व्यवस्था को सुधारने पर लड़ते हैं। इनके पास बस एक ही मुद्दा है वो हिंदू है और वो मुसलमान।

धर्म क्या है?

ये सोचने वाली बात है कि कितने गिरते जा रहे हैं समाज के लोग। अरे हम इंसान हैं और हम एक इंसानियत के पैजामे में रहकर भी रिश्ते निभा सकते हैं। धर्म के नाम पर समाज में गंदगी फैला रहे ऐसे लोगों से जरा धर्म का मतलब पूछिए तो इनको नहीं पता होगा। बेवजह की बातों में वक्त खराब करने से अच्छा है कि ग्रंथों को उठाकर पढिए की धर्म क्या है? सभी प्राणियों के हित में लगे रहने वाले लोगों ने दान को ही धर्म बताया है। लेकिन ऐसे घटिया कर्म नहीं कि धर्म के नाम पर दान की जगह हड़पने का विचार हो। मौजूदा हालात में देखा जाए तो तथाकथित धर्म के नाम पर लोगों का खून बहाया जाता है। धर्म के चोचले बघारते हुए मासूमों की हत्या करने में भी लोग परहेज नहीं कर रहे हैं।

इस समाज में एक लंबे समय से ही जर, जोरू और जमीन के लिए लड़ाई होती रही है। वहीं जब लड़ाई धर्म और संप्रदाय के लिए होती है तो यी तीन चीजें उसमें भी लुट जाती हैं। यह साफ तौर पर देखा जाता है कि अपने धर्म को बढ़ावा देने के लिए लोग धरती पर उपद्रव करना शुरू कर देते हैं। वो पूरी भूमि ही धर्म के नाम पर हड़प लेना चाहते हैं। दरअसल बात धर्म की है ही नहीं ये ऐसे लोग हैं जो अपनी छोटी और घिनौनी सोच के कारण मजबूर हैं। ये वही लोग हैं जिनका मकसद बलवा, अपहरण, दंगा, फसाद, तस्करी जैसी सभी काली करतूतों के जरिए धर्म का विस्तार करना होता है या यूं कह लीजिए कि भूमि हड़पना होता है।

अगर गौर फरमाया जाए जनाब तो मानव समाज धर्म और जाति की लड़ाई लड़ते हुए उस मोड़ पर खड़ा हो गया है कि थोड़ा और आगे बढ़ जाए निश्चित तौर पर उसका सर्वनाश होना सुनिश्चित है। गलती आज के इन युवाओं की नहीं है गलती तो परवरिश की है। दरअसल ध्यान देने वाली बात ये है कि जब एक मासूम बच्चा धरती पर जन्म लेता है तो वह धीरे-धीरे सही और गलत के हर पहलू को टटोलता है। आखिरकार उसको परवरिश देने वाले लोग यह समझाकर ही दम लेते हैं कि समाज में कौन से लोग छोटे कहे जाते हैं और कौन से लोग बड़े होते हैं।

यकीन मानिए जनाब इतने वाहियात लोग हैं इस समाज में कि हिंदू, मुस्लिम, सिक्ख, ईसाई धर्म देखकर ही लोगों से ताल्लुक रखते हैं। यदि आप इसी तरह धर्म के नाम पर प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से लड़ते रहे तो वो दिन दूर नहीं जब सभी को सामूहिक रूप से मरने के लिए तैयार होना पड़ेगा।

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